संगीत क्या है?? और इसकी जरूरत क्यों?

    ऐसे संगीत को भारतीय संस्कृति की नजर से गन्धर्व विद्या कहते हैं। लेकिन ये ललित कला की श्रेष्ठ कृति है। क्यों कि ये बादन, गायन, नृत्य की समाहार है, जो शिर्फ़ इंसान को नहीं, अपितु जानवर को भी बशिभुत करने की क्षमता रखता है।
      ऐसे धरती पर जबसे मानब सभ्यता शुरू हुई है, तब से संगीत की भी प्रारंभ हो चुका था। चाहे वह यूरोप हो या एशिया। लेकिन संगीत शस्त्र में भारतीय महाद्विप की अवदान सर्बपरि है।
   भारतीय पुराण की हिसाब से जब शिबजी की डमरू,नारद की बीणा से नाद ब्रह्म और शब्द ब्रह्म के अनोखा मिश्रण हुआ तो कि विष्णु आंख से आनंद की अश्रू बहने लगी। जिसको ब्रह्मा ने अपने कमंडलु में रखा था। बाद में भगीरथ ने धरती को लाया । जिसे मैया गङ्गा  कहते हैं।
    मतलब सङ्गीत की अपार शक्ति होती है। भगवान कृष्ण जी का जिंदेगी बंदिशाला से शुरु हो कर जरा शबर की तीर से खत्म हुआ। लेकिन जिंदगी की हरेक पल कष्ट होते हुए भी दुःखी नहीं, बल्कि धरती को गीता के महासंदेश दे दिया। लेकिन उनके बंशी उनको स्थित  प्रज्ञ योगीराज बनादिया।
आइंनस्टाइन जैसे प्रख्यात वैज्ञानिक और एल्बर्ट सेटसर भी बेहेला बादक थे। इसे पता चलता है सङ्गीत की उपयोगी क्यों है। ©Manoranjan Music Tutorials

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